हाइपोथायरायडिज्म (विशेष रूप से सेंट्रल हाइपोथायरायडिज्म) वाले मरीज में लेवोथायरोक्सिन शुरू करने से पहले एड्रेनल इन्सफिशिएंसी का मूल्यांकन और प्रबंधन
एड्रेनल इन्सफिशिएंसी और हाइपोथायरायडिज्म दोनों मौजूद होने पर, एड्रेनल क्राइसिस से बचने के लिए थायरॉइड हार्मोन शुरू करने से कई दिन पहले हमेशा कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स शुरू करना चाहिए। 1
सेंट्रल हाइपोथायरायडिज्म में एड्रेनल इन्सफिशिएंसी का संदेह कब करें
सेंट्रल हाइपोथायरायडिज्म (low/normal TSH के साथ low free T4) वाले मरीजों में एड्रेनल इन्सफिशिएंसी का उच्च जोखिम होता है, क्योंकि 75% से अधिक मामलों में दोनों स्थितियां एक साथ होती हैं। 1
प्रमुख नैदानिक संकेत जो एड्रेनल इन्सफिशिएंसी की ओर इशारा करते हैं:
- थकान, कमजोरी, और सिरदर्द 1
- पोस्चुरल हाइपोटेंशन 1
- हाइपोनेट्रेमिया 1
- हाइपोग्लाइसीमिया 2
- लेवोथायरोक्सिन शुरू करने के बाद लक्षणों में कोई सुधार नहीं 2
निदान के लिए आवश्यक परीक्षण
सुबह 8 बजे के आसपास निम्नलिखित परीक्षण करें (स्टेरॉइड देने से पहले): 1
- ACTH और कॉर्टिसोल (सुबह का नमूना): Low ACTH के साथ low cortisol सेंट्रल एड्रेनल इन्सफिशिएंसी को दर्शाता है 1
- 1 mcg cosyntropin stimulation test: यदि प्रारंभिक परीक्षण अस्पष्ट हों 1
- TSH और free T4: सेंट्रल हाइपोथायरायडिज्म की पुष्टि के लिए 1
- इलेक्ट्रोलाइट्स: हाइपोनेट्रेमिया की जांच 1
- अन्य पिट्यूटरी हार्मोन: LH, FSH, testosterone (पुरुषों में) या estradiol (महिलाओं में) 1
- MRI brain with pituitary cuts: यदि कई एंडोक्राइन असामान्यताएं हों या गंभीर सिरदर्द/दृष्टि परिवर्तन हों 1
महत्वपूर्ण चेतावनी: प्राथमिक बनाम सेंट्रल एड्रेनल इन्सफिशिएंसी
ACTH और cortisol के बीच संबंध से प्राथमिक और सेंट्रल एड्रेनल इन्सफिशिएंसी में अंतर किया जा सकता है। 1 यदि ACTH low है और cortisol भी low है, तो यह सेंट्रल एड्रेनल इन्सफिशिएंसी है। 1
ध्यान दें: अन्य स्थितियों के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स ले रहे मरीजों में iatrogenic secondary adrenal insufficiency के कारण सुबह का cortisol low होगा, और ACTH भी low होगा। 1 ऐसे मामलों में निदान चुनौतीपूर्ण है। 1
उपचार प्रोटोकॉल: क्रमबद्ध दृष्टिकोण
चरण 1: पहले एड्रेनल रिप्लेसमेंट शुरू करें
एड्रेनल इन्सफिशिएंसी की पुष्टि होने पर तुरंत कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स शुरू करें, थायरॉइड हार्मोन से कई दिन पहले। 1
रखरखाव खुराक (Maintenance doses):
- Hydrocortisone: 10-20 mg सुबह मौखिक रूप से, 5-10 mg दोपहर में 1
- या Prednisone: 5 mg सुबह 1
- Fludrocortisone: 0.1 mg प्रतिदिन एक बार (यदि प्राथमिक एड्रेनल इन्सफिशिएंसी हो) 3
मध्यम लक्षणों के लिए (Grade 2):
- रखरखाव खुराक से 2-3 गुना शुरू करें 1
- Prednisone 20 mg प्रतिदिन या hydrocortisone 20-30 mg सुबह और 10-20 mg दोपहर में 1
- 5-10 दिनों में रखरखाव खुराक तक कम करें 1
गंभीर लक्षणों के लिए (Grade 3-4):
- आपातकालीन विभाग में भर्ती करें 1
- Normal saline (कम से कम 2 L) IV 1
- Hydrocortisone 100 mg IV तुरंत 1
- या Dexamethasone 4 mg यदि निदान अस्पष्ट हो और stimulation testing की आवश्यकता हो 1
- 7-14 दिनों में रखरखाव खुराक तक कम करें 1
चरण 2: कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के कई दिन बाद लेवोथायरोक्सिन शुरू करें
कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स शुरू करने के कई दिन बाद ही लेवोथायरोक्सिन शुरू करें। 1 यह एड्रेनल क्राइसिस को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि थायरॉइड हार्मोन कॉर्टिसोल की मांग बढ़ा सकता है। 1
लेवोथायरोक्सिन खुराक:
- वजन के अनुसार खुराक 1
- सामान्यतः 1.6 mcg/kg/day से शुरू करें
निगरानी:
- Free T4 के स्तर से खुराक समायोजित करें, TSH से नहीं (क्योंकि सेंट्रल हाइपोथायरायडिज्म में TSH सटीक नहीं होता) 1
मरीज शिक्षा और दीर्घकालिक प्रबंधन
सभी एड्रेनल इन्सफिशिएंसी वाले मरीजों को निम्नलिखित निर्देश दें:
- Stress dosing: बीमारी, चोट, या तनाव के दौरान खुराक दोगुनी करें 1
- Medical alert bracelet: हमेशा पहनें 1
- आपातकालीन glucocorticoid injection: घर पर रखें 1
- Steroid card: हमेशा साथ रखें 3
दीर्घकालिक निगरानी:
- हाइपोफिसाइटिस से जुड़े एड्रेनल इन्सफिशिएंसी और हाइपोथायरायडिज्म आमतौर पर स्थायी होते हैं और आजीवन हार्मोन रिप्लेसमेंट की आवश्यकता होती है 1
- सर्जरी या किसी भी प्रक्रिया से पहले एंडोक्राइन परामर्श लें 1
सामान्य गलतियां और उनसे बचने के तरीके
सबसे बड़ी गलती: एड्रेनल इन्सफिशिएंसी का मूल्यांकन किए बिना सेंट्रल हाइपोथायरायडिज्म में लेवोथायरोक्सिन शुरू करना। 2 यह जीवन-घातक एड्रेनल क्राइसिस का कारण बन सकता है। 1
अन्य सामान्य गलतियां: